हमारीवाणी दिशा-निर्देश

हमारीवाणी पर प्रकाशित होने वाली ब्लॉग-पोस्ट / टिप्पणियों में निम्नलिखित बिंदु पाए जाने पर बिना किसी पूर्व सूचना के पोस्ट को हटाया जा सकता है अथवा ब्लॉग / ब्लॉग स्वामी की सदस्यता को निलंबित  / निरस्त किया जा सकता है।

  1. धर्म / जाति / लिंग / समूह / समाज अथवा व्यक्ति विशेष इत्यादि को अपमानित करने के उद्देश्य से लिखी गई पोस्ट अथवा टिप्पणियाँ पाए जाने पर।
  2. अपशब्द / यौनिक गालियों का प्रयोग होने पर।
  3. एक ही कंटेंट वाली पोस्ट 12 घंटे से पहले दुबारा प्रकाशित होने पर।
  4. हिंसात्मक शब्दों के प्रयोग होने पर।
  5. राष्ट्रद्रोह से जुड़े कंटेंट पर।
  6. माननीय न्यायलय  अथवा  माननीय राष्ट्रपति जैसी राष्ट्र की सर्वोच्च संस्थाओं के विरुद्ध  झूठे / दुर्भावनापूर्वक लिखे कंटेंट पर।

हमारीवाणी एक भारतीय मंच है, जिसका ध्येय हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओँ के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ उपयोगकर्ताओं के लिए एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना है जो कि व्यावहारिक और आसान हो। इस मंच के द्वारा हिंदी ब्लॉग लेखन को एक नई सोच के साथ प्रोत्साहित किया जा रहा है, साथ ही लेखकों की भावनाओं का पूरा ध्यान रखते हुए लेखन से सम्बंधित सभी आवश्यकताओ का ध्यान रखे जाने का ध्येय है। हमारीवाणी प्रत्येक भारतवासी को बिना किसी क्षेत्र, भाषा, धर्म, लिंग इत्यादि में भेदभाव किये सबको एक जैसी सुविधाएँ उपलब्ध करता है।

हमारीवाणी एक सामूहिक मंच है इसलिए ब्लॉग लेखकों को सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वाह भी करना चाहिए. अगर आप एक व्यक्तिगत / सामूहिक ब्लॉग स्वामी हैं तो आपको यह भी ध्यान देना आवश्यक है कि आपके ब्लॉग पर किसी भी यूज़र के द्वारा किसी धर्म / जाती / लिंग अथवा व्यक्ति विशेष को अपमानित करने के उद्देश्य से दुर्भावनापूर्ण पोस्ट नहीं लिखी जाए। साथ ही पोस्ट में अपशब्द / यौनिक गालियों का प्रयोग भी नहीं किया जाए। ऐसे किसी भी ब्लॉग की उक्त पोस्ट अथवा सदस्यता को टीम हमारीवाणी द्वारा कभी भी बिना सूचना के निलंबित किया जा सकता है।

सभी व्यक्तिगत / सामूहिक ब्लॉग स्वामियों से अनुरोध है कि किसी भी पोस्ट को दुबारा किसी और ब्लॉग पर प्रकाशित करने में कम से कम 12 घंटे का अंतराल रखें। एक ही पोस्ट एक साथ कई ब्लॉग्स पर प्रकाशित न करें। हमारा प्रयास है कि सभी ब्लॉग लेखकों को बराबर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। क्योंकि मुख्य प्रष्ट पर सीमित संख्या में ही पोस्ट दर्शाई जा सकती हैं, इसलिए इस तरह एक ही पोस्ट को अलग-अलग ब्लॉग पर एक ही समय में प्रकाशित करने से अन्य ब्लॉग लेखकों के अधिकार का हनन होता है। ऐसा करना सुविधाओं का दुरूपयोग है तथा बार-बार ऐसा करने वाले ब्लॉग्स की पोस्ट अथवा सदस्यता को टीम हमारीवाणी द्वारा कभी भी निलंबित किया जा सकता है। टीम हमारीवाणी भविष्य में किसी भी ब्लॉग-पोस्ट के प्रकाशन को रोकने या हटाने का पूर्णत: अधिकार रखती है।

सभी उपयोगकर्ताओं के लिए यह जानना आवश्यक है कि हर समय सभी पोस्ट पर नज़र रखा जाना संभव नहीं है। इसलिए किसी ब्लॉग-पोस्ट के खिलाफ शिकायत मिलने तथा शिकायत में वास्तविकता पाए जाने पर ही "टीम हमारीवाणी" के लिए उक्त पोस्ट अथवा ब्लॉग पर कार्यवाही करना संभव है, अत: ऐसी किसी भी पोस्ट के आने पर तुरंत अपनी शिकायत दर्ज करें।

हमारीवाणी के मुख्य प्रष्ट पर "आपकी राय" नाम से कॉलम बनाया हुआ है, सभी उपयोगकर्ताओं से निवेदन है कि कृपया किसी भी प्रकार की शिकायत / सुझाव / प्रश्न को उसी कॉलम पर क्लिक करके हमें भेजें। ईमेल से भेजी गई शिकायत / सुझाव / प्रश्न पर ध्यान दिया जाना संभव नहीं है।

हमें आशा ही नहीं पूरा भरोसा है कि आप सब के प्यार और सहयोग से हमारीवाणी अपने नाम के अनुरूप सब की आवाज़ को सम्मान देते हुए एक सशक्त मंच बनेगा।


नोट: भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत इंटरनेट पर किसी संस्था / व्यक्ति / धर्म  / जाति / समाज  इत्यादि के खिलाफ घृणास्पद अथवा मिथ्या आरोप लगाने वाले लेख / कमेंट लिखना प्रतिबंधित कर दिया गया है। यदि किसी लेख / ब्लॉग की भाषा पर आपत्ति पाई जाती है तो उसकी जिम्मेदारी पूरी तरह ब्लॉग / पोस्ट लेखक की होगी।






सहयोग की आशा के साथ!

टीम हमारीवाणी

76 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बहुत आभार इसके लिए
    ऐसे ही कदम की आवश्यकता थी
    पुनश्च बधाई स्वीकार करे

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  2. आपने समय रहते यह कदम उठाया , इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद । हमारी वाणी की गुणवत्ता को बनाये रखना हम सभी बलॉगर्स की नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है ।
    और सभी ब्लॉगर्स को यह ध्यान रखना चाहिय कि वह ऐसा ना लिखे जिससे इस मंच की गरिमा को ठेस पहुँचे ।

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  3. लेवल प्लेइंग फील्ड का मतलब होता है सभी ब्लॉगर्स को एक समान मौका देना...ऐसे में मैनिपुलेशन्स के ज़रिए एक ही मैटर को कई-कई ब्लॉग्स पर लगाना जहां सभी को उकताता है, सर्वर पर प्रैशर बढ़ाता है, दूसरे ब्लॉगर्स की पोस्ट को दबाता है, ये निश्चित रूप से रोका जाना चाहिए...अन्यथा इससे हमारी वाणी पर ही आरोप लग सकता है कि जान-बूझ कर ऐसी चीज़ों को प्रोत्साहन दिया जा रहा है...मेरा हमेशा यही मत रहा है कि हमें ब्लॉग पर कोई भी सामग्री डालते वक्त संपादक की तरह व्यवहार करना चाहिए...

    जय हिंद...

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  4. ये एक अच्छी पहल है और इस पहल का मैं स्वागत करता हूँ ! सुविधाओं का दुरुपयोग कदापि नहीं होना चाहिए इससे एक एग्रीगेटर की भूमिका पर प्रश्न चिन्ह लगता है, सामूहिक ब्लॉग के मॉडरेटर को एक संपादक की भूमिका निभानी होगी और पोस्ट प्रकाशन पर पैनी नज़र रखनी होगी !

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  5. हमारीवाणी द्वारा की गई इस पहल का मैं हार्दिक-हार्दिक स्वागत करता हूँ और विशेष निवेदन भी कि इस सन्दर्भ में धार्मिकता के लेबल वाले किसी भी ब्लाग पर (चाहे वे किसी भी धर्म या पंथ के अनुयायी हों) उन पर विशेष नजरें रखी जावें । धन्यवाद सहित...

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  6. इस पहल का हार्दिक स्वागत है।

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  7. सही कदम है । ब्लोगिंग भी सुव्यवस्थित होनी चाहिए ।
    कृपया आप भीहमारीवानी में सुधार लायें । अभी तो कई प्रोब्लम्स चल रही हैं ।
    शुभकामनायें।

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  8. pichle kai dino .... aur .........anewale kai dino tak ke liye
    sabse matwapoorn post ke liye 'team hamariviani' ko kotisha: naman........

    pranam.

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  9. My Dear Shah Nawaz, Thanks for coming to my Blog Copycats. You have by mistake advised me to submit my blog to Hamarivani. I will draw your attention to the fact that my blog Copycats has been submitted and listed in Hamarivani long back. However, for some inexplicable reasons, it is not updated there. You can also see the logo of Hamarivani in both of my Blogs.
    Thanks

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  10. Indranil भट्टाचार्जी जी,

    आपने अपने ब्लॉग "जज़्बात, ज़िन्दगी और मैं" का क्लिक कोड ही अपने दुसरे ब्लॉग "Copycats" पर लगाया हुआ है. हमारीवाणी पर हर ब्लॉग के लिए अलग क्लिक कोड है. आपसे अनुरोध है की कृपया हमारीवाणी पर लोगिन करके ऊपर, दाई और लिखे "झट से यहाँ पोस्ट लाने के लिए फट से क्लिक कोड अपने ब्लॉग पर लगाएं (पहले लोगिन करें)" पर क्लिक करें, इसके बाद खुलने वाले प्रष्ट पर आपको अपने सभी ब्लोग्स के लिए क्लिक कोड दिखाई देंगे. इसके अतिरिक्त जब भी नई पोस्ट लिखे तब तुरंत ही अपने ब्लॉग पर लगे हमारीवाणी लोगो पर अवश्य क्लिक करें, इससे आपकी पोस्ट तुरंत ही हमारीवाणी पर प्रकाशित हो जाएगी.

    धन्यवाद!
    टीम हमारीवाणी

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  11. @डॉ टी एस दराल
    बड़े भाई! हमारीवाणी लगातार विकसित होता हुआ ऐग्रीगेटर है। इस में लगातार तकनीकी फेरबदल किए गए हैं और किए जाते रहेंगे। यह इस ऐग्रीगेटर को नई आवश्यकताओं के अनुरूप बनाए रखने के लिए आवश्यक भी है। कमियों की ओर आप ध्यान दिलाते रहें। उन्हें दूर करने का प्रयत्न किया जाएगा। आशा है आप का सक्रिय सहयोग जारी रहेगा।

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  12. भारत सरकार की चेतावनी के बारे में पहले ही बता दिया, ये अच्छा किया,

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  13. जिस तरह इस मीडिया का दुरूपयोग कर अफवाहें फ़ैलाने की साजिश रची गयी उसके मद्दे-नज़र यह निर्णय उचित है. इंटरनेट की दुनिया के लोग सरकारी तंत्र के सक्रिय होने से पहले ही स्वयं ऐसी साजिशों का मुहतोड़ जवाब देंगे. सतर्कता जरूरी है. एक आचार संहिता का पालन किया जाना चाहिए. लेकिन यह भी ध्यान रहे कि सरकारी सक्रियता सीमा का उल्लंघन कर अभिव्यक्ति के अधिकार पर आघात न करे.

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  14. सतर्कता हेतु अत्‍यावश्‍यक कदम उठाना जरूरी है। ताकि लेखक और हम सब सुरक्षित लेखन करते रहे।

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  15. देर से उठाया गया एक सही कदम !
    बधाई !

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    1. वाणी जी, यह कदम तो पिछले वर्ष ही उठा लिया गया था. इस वर्ष तो कुछ संशोधनों के साथ दुबारा प्रकाशित किया है.

      टीम हमारीवाणी

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  16. बहुत अच्छा प्रयास है, एसे कंटेन्ट पढ कर लोगो मे निराशा आती है|

    उत्तर देंहटाएं
  17. आप संकलक हैं.. संकलक ही रहें तो ज्यादा अच्छा रहेगा.. मोडरेटर न बनें.... पहला और तीसरा प्वाइंट तो ठीक है... बाकी सब बकैती है... इतनी शर्तों और मोडरेशन के खिलाफ ही तो ब्लॉगिंग की शुरूआत हुई थी.. वरना लोग अखबारों और पत्रिकाओं में तो लिख ही रहे थे.. फिर अंतर क्या रह जायेगा...वहाँ संपादक को खुश करो यहाँ एग्रीगेटर को...
    और फिर आप कैसे डिसाइड करेंगे कि क्या राष्ट्रहित में है और क्या नहीं... ? और अगर कोई पोस्ट ठेठ गाँव के माहौल के बारे में लिखी जाए या किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में जो गालियाँ देता हो तो गालियाँ तो आयेंगी ही... और फिर ब्लागर अगर पोस्ट में गालियाँ देना ही चाहता है तो ये उसका अधिकार है.. अप क्यों बीच में जज बन रहे हैं? जब तक ये किसी को कष्ट या हानि न पहुंचा रहा हो..
    ज्यादा समस्या है तो एक 'आपत्ति' का बटन लगा दीजिए जिसपर क्लीक करके लोग किसी गलत पोस्ट को रिपोर्ट कर सकें... आप लोगों पर छोड़िये न कि क्या पढ़ें और पढ़के क्या निष्कर्ष निकालें.. आप खुद क्यों 'गार्जियन' बन रहे हैं...
    माफ करेंगे कड़ी भाषा के लिए... यह हमारीवाणी साईट के लिए है न कि इसे चलने वालों के लिए.. आपका मैं बहुत आदर करता हूँ... और हमारीवाणी के भले के लिए ही ये कह रहा हूँ... धन्यवाद...

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    1. @ Satish Chandra Satyarthi जी

      ऊपर लिखा गया है कि शिकायत मिलने पर ही कार्यवाही की जाएगी ना कि टीम हमारीवाणी अपनी इच्छा से कार्यवाही करेगी और ना ही इसमें एग्रीगेटर को खुश करने की किसी को कोई आवश्यकता है, बल्कि यह आचार संहिता हमारे देश के कानून को देखकर बनाई गई हैं साथ ही इस बात का ध्यान रखा गया है कि जानबूझ कर किसी भी ब्लॉगर को निशाना बनाकर अपशब्द ना लिखे जाएँ. कोई भी सभ्य समाज यौनिक गलिया / आपत्तिजनक शब्दों को स्वीकार नहीं करता है. और हमारा प्रयास भी उन्ही अपशब्दों से इस मंच को दूर रखने का है जिसपर उपयोगकर्ताओं / पाठकों को आपत्ति हो.

      माननीय नयायालय / माननीय राष्ट्रपति जैसी सर्वोच्च संस्थाओं के विरुद्ध अपशब्द लिखना भी भारतीय कानून का उल्लंघन माना जाता है, इसके साथ-साथ अतिवादियों / आतंकवादियों तथा असामाजिक तत्वों के द्वारा भी देशद्रोह तथा राष्ट्र के खिलाफ साज़िश के प्रयास किये जाने की आशंका के मद्देनज़र इस बिंदु का होना आवश्यक है जिससे कि उपयोगकर्ता ऐसी किसी भी हरकत को देखकर तुरंत उसकी शिकायत कर सकें.

      हमारा प्रयास मोडरेशन बिलकुल भी नहीं है और ऐसा आप हमरवाणी पर प्रकाशित होने वाली पोस्टों को देखकर लगा सकते हैं.

      सहयोग की आशा के साथ
      टीम हमारीवाणी

      हटाएं
    2. @सतीश जी - छोडिये भी ना इन सब चक्करों को. मैं पिछले दो-तीन सालों से किसी भी नए ब्लॉग पर किसी अग्रीगेटर से नहीं पहुंचा हूँ. आपके ब्लॉग पर भी कहीं और से ही पहुंचा था. और मुझे यह भी नहीं पता की मेरा ब्लॉग किस-किस अग्रीगेटर पर है और कहाँ नहीं है? एक जमाना हुआ किसी एग्रीगेटर साईट को खोल कर देखे हुए. यहाँ भी कहीं और से ही पहुंचा हूँ.
      और भी गम हैं जमाने में अग्रीगेटर के सिवा.. :-)

      वैसे मैं आपको यह सब क्यों कह रहा हूँ, आप भी पुराने पके हुए ब्लोगर हैं और इन सबसे वाकिफ़ भी हैं. :-)

      हटाएं
  18. आदरणीय सम्पादक जी आपको व आपकी साहित्य टीम को हमारी शुभ कामनाये. आपके माध्यम से [ हमारी वाणी ] हमारी वाणी न होकर जनवाणी है प्रत्येक साहित्यकार, लेखक, काव्य,शायर क़ि कलम से लिखने वाली भाषा जो समाज को जाग्रत करते हुए समाज को दिशा दे भारतीय संस्क्रती व संस्कारो को बचा कर रखे वही लेखनी हमारी वाणी है और जन जन क़ि वाणी है. आपको बधाई .संतोष गंगेले लेखक व जिला पत्रकार संघ उपाध्यक्ष छतरपुर मध्य प्रदेश 09893196874

    उत्तर देंहटाएं
  19. यह एक स्वागत योग्य क़दम है। हम आपका पूर्ण रूपेण समर्थन करते हैं।

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  20. अच्छी पहल है और इस पहल का मैं स्वागत करता हूँ !!

    उत्तर देंहटाएं
  21. इस सार्थक पहल के लिये आपका धन्यवाद.

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  22. Ek achhi Pahel hai..Ummed karta hoon aap dhyan banaye rakhenge.

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  23. उत्तर के लिए धन्यवाद...
    अगर कई लोग किसी पोस्ट के बारे में शिकायत करते हैं तो उसे हटाने में कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए... लेकिन आपको सतर्क रहना होगा कि कोई निर्दोष ब्लॉगर व्यक्तिगत दुर्भावनाओं और गुटबाजी का शिकार न हो... वैसे व्यक्तिगत रूप से मैं राष्ट्रपति, न्यायलय, संसद या संविधान किसी को भी आलोचना के ऊपर नहीं मानता... जनता सर्वोपरि है... कुछ गलत है तो उसकी आलोचना होनी चाहिए.. हाँ अपशब्द गलत हैं चाहे वो राष्ट्रपति के बारे में हों या गली के मंगरू के बारे में...
    बाकी हमारीवाणी को चलाने वाले गुणी लोग हैं.. मेरी सारी शुभकामनाएँ आपके साथ हैं...

    उत्तर देंहटाएं
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    1. सतीश चंद्र सत्यार्थी जी,

      ऐसे मुद्दों के लिए अलग से हिंदी ब्लॉगर्स में से ही एक मार्गदर्शक मंडल बनाया गया है और उनपर उनका निर्णय माना जाता है.

      हटाएं
  24. "नोट: भारत सरकार की नई आईटी पॉलिसी के तहत इंटरनेट पर किसी संस्था / व्यक्ति / धर्म / जाति / समाज इत्यादि के खिलाफ घृणास्पद, विवादस्पद अथवा मिथ्या आरोप लगाने वाले लेख / कमेंट लिखना प्रतिबंधित कर दिया गया है। यदि किसी लेख / ब्लॉग की भाषा पर आपत्ति पाई जाती है या कानूनी कार्रवाई की जाती है तो उसकी जिम्मेदारी पूरी तरह ब्लॉग / पोस्ट लेखक की होगी। "

    ठीक ही किया श्रीमान जो समय रहते चेता दिया,वरना मेरी जैसी मोटी खोपड़ी के कुछ प्राणी तो दिल्ली की सड़कों पर भी निकलते ही यह सोच के है कि मानो पाकिस्तान के उत्तरी वजीरिस्तान की सफारी पर निकले हुए हो !
    लगता है आप भी डर गए,और देश में आज जिस तरह के हालात है, जैसा माहौल है, आपका डरना भी जायज है! अंग्रेज और तमाम विदेशी आक्रान्ताओं का यह मामना था कि हिन्दुस्तानियों के शरीर में आम इंसानों के मुकाबले वैसे भी एक हड्डी कम होती है! :)


    "माननीय न्यायलय, माननीय राष्ट्रपति अथवा राष्ट्र की अन्य सर्वोच्च संस्थाओं के विरुद्ध लिखे कंटेंट पर।"

    वैसे तो आपने श्री सतीस चन्द्र सारथी जी को दिए जबाब में काफी कुछ स्पष्ट कर दिया कि इन माननीय संस्थाओं के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए मगर जहां तक इनके विरुद्ध लिखने का सवाल है , मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूँ ! अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता यह नहीं कहती कि अगर ये हमारी सर्वोच्च संस्थाए कुछ गलत कर रही है तो चुपचाप मूकदर्शक बने रहो , इनके खिलाफ आवाज मत उठाओ ! आज जो कुछ इन सरवोछ संस्थाओं में हो रहा है, वह सब-कुछ ठीक नहीं है और इनके खिलाफ आवाज उठाना( एक भद्र तरीके से ) मैं समझता हूँ कि हर नागरिक का कर्तव्य है !

    " राष्ट्रद्रोह से जुड़े अथवा राष्ट्रहित के खिलाफ लिखे कंटेंट पर। "

    वर्तमान परिस्थितियों में इसे और विस्तृत ढंग से परिभाषित करने की सख्त आवश्यकता है ! मैं समझता हूँ कि हमारीवाणी की टीम को माननीय अधिवक्ता द्विवेदी जी का भी आशीर्वाद प्राप्त है, अत: इस विषस्य को एलेबोरेट करने में उनकी भूमिका अहम् हो सकती है ! क्योंकि हालिया घटनाओं और अनुभवों में केंद्र सरकार का रवैया यह साबित करने के लिए पर्याप्त है कि वह अपने से असहमत लोगों को देश के लिए खतरा बताने से भी परहेज नहीं करती! जो कोई उनके खिलाफ बोलने की जुर्रत करता है उसे देश के समक्ष इस तरह प्रतुत किया जाता है कि अमुक इंसान बीजेपी और संघ के इशारे पर काम कर रहा है ! क्या बीजेपी अथवा संघ इस देश में प्रतिवंधित संघठन है जो यह ऐसा कहते है ? और मुझे तो हाल में जो एमएमएस और एसएम्एस की अफवाहों का प्रकरण हुआ उसमे भी किसी साजिश की बू आ रही है ! मेरा तो यह मानना है कि ब इन्हें एक पाकिस्तानी ब्लोगर के ब्लॉग के मार्फ़त यह पता चला होगा कि किस तरह तस्वीरों और तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया मुंबई दंगो के लिए तो ऐसी खुरापात सुजाने वालों की इनके पास कमी नहीं है कि यह एक अच्छा मौक़ा है , पाकिस्तान के कंधे पर बन्दूक रखकर देश के सोशल मीडिया और उससे जुड़े लोगो को सबक सिखाने का ! अगर ऐसा नहीं था तो याद कीजिये कि जब विदेश सचिव ने पाकिस्तान पर आरोप लगाए थे कि इसमें उसका हाथ है तो साथ ही यह भी कहा था कि हम उसे जल्द इसके प्रमाण देंगे ! अभी तक क्यों नहीं दिए ? म्यांमार की आड़ में इनकी कार्यवाही तो यही इंगित करती है और कितनी हास्यास्पद बात है कि इस देश का अल्पसंख्यक अपने देश की चिंता छोड़, झूटी तस्वीरों के आधार पर देश का अमन-चैन खतरे में डालकर म्यांमार के विस्थापितों की चिंता कर रहा है ! खैर, जहां य्तक बुद्धिजीवी वर्ग का सवाल है, मुझे उम्मीद है कि वह समझदार है, देश के लिए क्या अक्स्च्चा है और क्या बुरा उसे समझता है और ऐसी कोई कोशिश नहीं करेगा कि देश की फिजा खराब हो, देश में आपसी अमनचैन खतरे में पड़े, परस्पर दुश्मनाई बढे और देश और गर्त में जाए ! अगर कोई बुद्धिजीवी वर्ग ऐसा करता है तो शायद उससे बड़ा देश का दुश्मन और कोई नहीं !


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    उत्तर
    1. @ पी.सी.गोदियाल "परचेत" जी

      टिप्पणी के लिए धन्यवाद, आपकी सलाह पर अवश्य ही ध्यान दिया जाएगा!

      हटाएं
  25. ये तो आपने बहुत अच्छा किया...

    उत्तर देंहटाएं
  26. आचार संहिता हमारे उद्देश्यों की शुचिता को कायम रखने के लिए होता है और आपका ये दिशा निर्देश समुचित है.

    उत्तर देंहटाएं
  27. इस सार्थक पहल का हार्दिक स्वागत है।

    उत्तर देंहटाएं
  28. देर से उठाया गया ये सार्थक कदम स्वागत योग्य है.

    उत्तर देंहटाएं
  29. पर आप तो ब्लॉग पर से पोस्ट तो automatically उठाते हैं. तो ऐसी स्थिति में आप कुछ ऐसा व्यवस्था करें कि आपत्तिजनक पोस्ट सिर्फ आपके अग्रीगेटर पर न आए और लेखक के इच्छा के अनुरूप उनके ब्लॉग पर बना रहे.

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. @ महेश कुमार वर्मा : Mahesh Kumar Verma जी

      हमारीवाणी पर पोस्ट स्वत: प्रकाशित (Auto Update) नहीं होती है, सम्बंधित ब्लॉग पर लगे 'हमारीवाणी क्लिक कोड' पर क्लिक करने से ही कोई भी पोस्ट हमारीवाणी पर प्रकाशित होती है.

      टीम हमारीवाणी

      हटाएं
  30. आप एक मंच दे रहे हैं इसलिए इन दिशा निर्देश का आपका देना बनता है ...
    मेरी शुभकामनाएं!

    उत्तर देंहटाएं
  31. भारत सरकार कोई नियम बनाये या न बनाये परन्तु अपनी नैतिकता कहती है कि राष्ट्र का कदर करना हरेक नागरिक का दाय़ित्व है। और इसे हर हाल में निर्वाह करना चेहिए। सामाजिक भाईचारे का भी ख्याल रखना चाहिए,तभी स्वस्थ्य समाज का निर्माण हो सकता है।
    दिल्ली रत्न लाल बिहारी लाल

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  32. मतलब अब ब्लॉगवाणी के रूप मे एक और मठाधीश .... मतलब अब ब्लॉग वाणी के हिसाब से लिखना होगा

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    उत्तर
    1. पद्म सिंह जी,

      किसी को भी हमारीवाणी के हिसाब से लिखने की कोई आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह जो अचार संहिता है यह केवल कानून ही नहीं अपितु हमारे समाज का हिस्सा है.

      क्या आपको इसमें से किसी पर भी एतराज़ है?

      हटाएं
  33. माफ करिए ... हमारी वाणी पढ़ें

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  34. आपने समय रहते यह कदम उठाया , इसके लिये बहुत बहुत धन्यवाद । हमारी वाणी की गुणवत्ता को बनाये रखना हम सभी बलॉगर्स की नैतिक जिम्मेदारी भी बनती है ।
    और सभी ब्लॉगर्स को यह ध्यान रखना चाहिय कि वह ऐसा ना लिखे जिससे इस मंच की गरिमा को ठेस पहुँचे ।

    उत्तर देंहटाएं
  35. बहुत अच्छी कोशिश "हमारीवाणी "। कृपया मेरी नयी पोस्ट को भी अवश्य पढ़े ।धन्यवाद

    मेरी नयी पोस्ट है - "क्या आप इंटरनेट पर ऐसे मशहूर होना चाहते है ?"

    मेरा ब्लॉग पता है - harshprachar.blogspot.com

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  36. राजपूत कभी खूंख्वार नही था,उसे केवल रक्षा करनी आती थी,लेकिन समाज के तानो से और समाज की गिरती व्यवस्था को देखने के बाद राजपूत खूंख्वार होना शुरु हुआ है,राजपूत को अपशब्द पसंद नही है। वह कभी किसी भी प्रकार की दुर्वव्यवस्था को पसंद नही करता है।
    (उपरोक्त तस्वीर श्री रणजीत सिंह ने भेजी है)

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  37. आरब मारयो अमरसी,बड़ हत्थे वरियाम,
    हठ कर खेड़े हांरणी,कमधज आयो काम |
    कमर कटे उड़कै कमध, भमर हूएली भार,
    आरब हण हौदे अमर, समर बजाई सार ||

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  38. समंदर पूछै सफ्फरां, आज रतंबर काह|
    भारत तणे उम्मेद सी, खाग झकोळी आह||
    घोड़ा पाखर-घल रही,भड़ा न पायो भेद |
    आज कस्या गढ़ उपरां,आरम्भ रच्यो उम्मेद||

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  39. gas bhi mahngi. cerosin bhi mahnga.lakdi katna apradh hai. ab khana kya hawa se banayenge.

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  40. Sarkaar ki nitiyon ki alochana toh kar sakte hain ham. mujhe lagta hai.

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  41. कलुषित मानसिकता एवं दुर्भावना से किए जाने वाले लेखन पर कुछ लगाम तो कसी ही जानी चाहिए. प्रशंसनीय पहल के लिए धन्यवाद.

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  42. एक हिसाव से आपके एग्रीगेटर के कायदे कानून ठीक ही हैं किन्तु आजकल सत्ता जिस प्रकार किसी को भी कानूनों का हवाला देकर फसा रही है उससे कायदे कानूनों पर से भी भरोसा उठता सा जा रहा है लगता है कि किसी भी कानून को शायद तोड़ा मरोड़ा जा सकता है। खैर बात करते है एग्रीगेटरों की उपयोगिताओं की तो सर जी आजकल लगता है एग्रीगेटरों पर भीड़ कुछ ज्यादा ही हो गयी है सो पाठक के मतलब की खोज एग्रीगेटरों पर भी आसान नही रह गयी है तो जरुरत है कि एग्रीगेटरों को श्रेणी बद्ध किया जाना चाहिये जैसे आयुर्वेद के व्लागों की एक श्रेणी, साहित्यिक व्लागो की एक अलग श्रेणी,तकनीकी ब्लाग एक जगह राजनैतिक एक जगह कहानी कविता वाले अलग अलग इस प्रकार पाठक को अपने मतलब की सामिग्री आसानी से मिल पाएगी।अब देखिये मेरा ब्लाग आपसे सितम्बर में जुड़ा है लैकिन आज तक हमारी वाणी से बहुत ही कम लोग आ पाये हैं।जवकि केवल अच्छी खबर डाट काम पर मेरी टिप्पणी से ही आपके एग्रीगेटर के मुकाबले कहीं अधिक लोग आ गये हैं।सो अगर आपको मेरा सुझाव अच्छा लगे तो कारवाई में लाए आपका मेरे ब्लाग को शामिल करने तथा इतने महत्वपूर्ण कार्य को चलाने के लिए वार वार धन्यबाद

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  43. Indian Goverment and Hamarari Vaani ki Puri Team k liye Dher Saari Subkaamnao Sahit...

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  44. साहब जी,

    हमारा ब्लॉग महीने भर से ज्यादा समय से आपके अग्ग्रीगेटर का हिसा बनने हेतु कतारित है. कृपया नज़र डाले और हमारा गुनाह बताएँ अथवा बरी करे !

    सादर,
    राजेश
    ब्लॉग - http://blog.creativeurja.com

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  45. आप जो चाहें करें आपको कोई क्या कह सकता है जी। मगर आपकी वाणी में घबराहट नहीं झलकना चाहिए, जो एक्चुअली झलक रही है। फिर भी मेरी नजर में आप लोग सही हैं।

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